जीवन जीने की कला और हमारी संस्कृति समाज और परिवार को चिरजीवीत रखने के गुरज्ञान सीख रही हैं 

विराट कन्या कौशल  प्रशिक्षण शिविर सिराली


जीवन जीने की कला और हमारी संस्कृति समाज और परिवार को चिरजीवीत रखने के गुरज्ञान सीख रही हैं 



सिरालीबालिकाओं के लिये बेहद सराहनीय कार्यक्रम सिराली में चल रहा। गायत्री परिवार की  सुनीता राजपूत ने बताया की  पंडित श्रीराम आचार्य शर्माजी की अभूतपूर्व सोच परिकल्पना जो आज समाजिक धरातल पर लहलहाती एक ऐसी फसल है जो नारीशक्ति मे प्राण फूंक रही है ....


जिसे स्वरूप देने का कार्य किया है गायत्री परिवार सिराली की बहनों व भाईयों ने शिविर के माध्यम से इस आवासीय शिविर मे जिले की लगभग 800 बालिकाऐं  ने भाग लिया है। शिविर में कन्या कौशल  प्रशिक्षण द्वारा इन बालिकाओं को जीवन जीने के तरीके, नारीशक्ति से अवगत कराया जा रहा है। वर्तमान परिवेश में परिवारों  मे संस्कारो की कमी , विश्व गुरु भारत के लिए अवरोध बन रहा है, आधुनिकता के दौड़ में नैतिकता को भूल कर वह पतन की रह पर निकल गया है, ।  कर्तव्य, अनुशासन, धर्म, कर्म, संस्कारो, के बिना आधुनिकता की ओर जाना सिर्फ महज एक बिना लक्ष्य के मार्ग पर दौड़ने के सामने है, जिसका कोई  उचित परिणाम नही है। 


शांति कुंञ्ज हरिद्वार से पधारी विदुषी बहनो द्वारा , जीवन जीने की कला और हमारी संस्कृति समाज और परिवार को चिरजीवीत रखने के गुरज्ञान सीख रही हैं